3. कर्मधारय समास (Karmadharay Samas)
कर्मधारय समास वह समास है जिसमें विशेषण-विशेष्य (गुणवाचक शब्द और जिसकी विशेषता बताई जा रही है) या उपमान-उपमेय (जिससे तुलना की जाए और जिसकी तुलना की जाए) का संबंध होता है। इसमें एक पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य, अथवा एक पद उपमान होता है और दूसरा पद उपमेय। विग्रह करने पर 'है जो', 'के समान', 'रूपी' आदि शब्दों का प्रयोग होता है। इस समास में दूसरा पद प्रधान होता है।
पहचान के प्रमुख बिंदु:
- एक पद दूसरे की विशेषता बताता है।
- दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है।
- दोनों पदों में उपमान-उपमेय का संबंध होता है।
- विग्रह करने पर 'है जो', 'के समान', 'रूपी' आदि शब्द आते हैं।
उदाहरण सहित विस्तृत व्याख्या:
आइए, विभिन्न प्रकार के उदाहरणों के माध्यम से कर्मधारय समास को समझते हैं:
A. विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास: इसमें पहला पद विशेषण होता है और दूसरा पद विशेष्य।
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नीलकमल:
- विग्रह: नीला है जो कमल
- व्याख्या: यहाँ 'नीला' विशेषण है और 'कमल' विशेष्य है। कमल की विशेषता बताई जा रही है कि वह नीला है।
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महात्मा:
- विग्रह: महान है जो आत्मा
- व्याख्या: 'महान' विशेषण है और 'आत्मा' विशेष्य है। आत्मा की विशेषता बताई जा रही है कि वह महान है।
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परमेश्वर:
- विग्रह: परम है जो ईश्वर
- व्याख्या: 'परम' विशेषण है और 'ईश्वर' विशेष्य है। ईश्वर की विशेषता बताई जा रही है कि वह परम है (सर्वोच्च)।
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पीताम्बर:
- विग्रह: पीत (पीला) है जो अम्बर (वस्त्र)
- व्याख्या: 'पीत' विशेषण है और 'अम्बर' विशेष्य है। वस्त्र की विशेषता है कि वह पीला है। (बहुव्रीहि समास भी हो सकता है यदि 'पीताम्बर' का अर्थ कृष्ण या विष्णु लिया जाए, लेकिन कर्मधारय में केवल वस्त्र के पीलेपन पर जोर है)।
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कापुरुष:
- विग्रह: कायर है जो पुरुष
- व्याख्या: 'कायर' विशेषण है और 'पुरुष' विशेष्य है। पुरुष की विशेषता बताई जा रही है कि वह कायर है।
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शुभागमन:
- विग्रह: शुभ है जो आगमन
- व्याख्या: 'शुभ' विशेषण है और 'आगमन' विशेष्य है। आगमन की विशेषता है कि वह शुभ है।
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सद्गुण:
- विग्रह: सत् (अच्छे) हैं जो गुण
- व्याख्या: 'सत्' विशेषण है और 'गुण' विशेष्य है। गुणों की विशेषता है कि वे अच्छे हैं।
B. उपमान-उपमेय कर्मधारय समास: इसमें एक पद उपमान (जिससे तुलना की जाए) होता है और दूसरा पद उपमेय (जिसकी तुलना की जाए)। उपमान प्रायः प्रसिद्ध वस्तु होती है।
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कमलनयन:
- विग्रह: कमल के समान नयन
- व्याख्या: यहाँ 'नयन' (उपमेय) की तुलना 'कमल' (उपमान) से की गई है। नयनों को कमल के समान सुंदर बताया गया है।
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चंद्रमुख:
- विग्रह: चंद्र के समान मुख
- व्याख्या: 'मुख' (उपमेय) की तुलना 'चंद्र' (उपमान) से की गई है। मुख को चंद्रमा के समान सुंदर बताया गया है।
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कनकलता:
- विग्रह: कनक (सोने) के समान लता
- व्याख्या: 'लता' (उपमेय) की तुलना 'कनक' (उपमान) से की गई है। लता को सोने के समान मूल्यवान या चमकीला बताया गया है।
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वज्रदेह:
- विग्रह: वज्र के समान देह
- व्याख्या: 'देह' (उपमेय) की तुलना 'वज्र' (उपमान) से की गई है। देह को वज्र के समान मजबूत बताया गया है।
C. उपमेय-उपमान कर्मधारय समास (रूपक कर्मधारय): इसमें उपमेय पहले आता है और उपमान बाद में। विग्रह करने पर 'रूपी' शब्द का प्रयोग होता है। इसमें उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाता है, अर्थात् उपमेय और उपमान में कोई भेद नहीं माना जाता।
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क्रोध अग्नि:
- विग्रह: क्रोध रूपी अग्नि
- व्याख्या: यहाँ 'क्रोध' (उपमेय) पर 'अग्नि' (उपमान) का आरोप किया गया है। क्रोध को अग्नि के समान तीव्र और दाहक बताया गया है।
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चरण कमल:
- विग्रह: चरण रूपी कमल
- व्याख्या: 'चरण' (उपमेय) पर 'कमल' (उपमान) का आरोप किया गया है। चरणों को कमल के समान कोमल और सुंदर बताया गया है।
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भवसागर:
- विग्रह: भव (संसार) रूपी सागर
- व्याख्या: 'भव' (उपमेय) पर 'सागर' (उपमान) का आरोप किया गया है। संसार को सागर के समान विशाल और पार करना कठिन बताया गया है।
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विद्याधन:
- विग्रह: विद्या रूपी धन
- व्याख्या: 'विद्या' (उपमेय) पर 'धन' (उपमान) का आरोप किया गया है। विद्या को धन के समान मूल्यवान और उपयोगी बताया गया है।
कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अंतर:
कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में कभी-कभी भ्रम हो सकता है, क्योंकि कुछ शब्द दोनों में प्रयोग हो सकते हैं। मुख्य अंतर यह है:
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कर्मधारय समास: इसमें एक पद दूसरे की विशेषता बताता है या उपमान-उपमेय का संबंध होता है। समस्त पद से किसी तीसरे अर्थ का बोध नहीं होता, बल्कि दोनों पदों के अर्थ ही प्रधान रहते हैं (दूसरा पद प्रधान होता है)।
- उदाहरण: पीताम्बर (पीला है जो अम्बर - वस्त्र की विशेषता)
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बहुव्रीहि समास: इसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं। समस्त पद किसी व्यक्ति, वस्तु या विशेष के लिए रूढ़ हो जाता है।
- उदाहरण: पीताम्बर (पीले हैं वस्त्र जिसके, अर्थात् श्री कृष्ण/विष्णु - तीसरे अर्थ का बोध)
निष्कर्ष:
कर्मधारय समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसकी सही पहचान के लिए विशेषण-विशेष्य और उपमान-उपमेय संबंधों को समझना अत्यंत आवश्यक है। मध्य प्रदेश प्राथमिक चयन परीक्षा 2025 के दृष्टिकोण से, छात्रों को इन नियमों और उदाहरणों का गहनता से अध्ययन करना चाहिए ताकि वे समास विग्रह और समस्त पद बनाने में त्रुटि न करें।
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