5th Day । हिंदी भाषा



स्वर संधि वह संधि होती है जिसमें दो स्वरों के मेल से विकार उत्पन्न होता है। यह हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है।

स्वर संधि के मुख्य पाँच भेद होते हैं:

दीर्घ स्वर संधि (Dirgha Swar Sandhi)

गुण स्वर संधि (Guna Swar Sandhi)

वृद्धि स्वर संधि (Vriddhi Swar Sandhi)

यण स्वर संधि (Yana Swar Sandhi)

अयादि स्वर संधि (Ayadi Swar Sandhi)

आज हम दीर्घ स्वर संधि को विस्तारपूर्वक 20 उदाहरणों सहित समझेंगे।

दीर्घ स्वर संधि (Dirgha Swar Sandhi)

दीर्घ स्वर संधि स्वर संधि का एक प्रकार है जिसमें दो समान ह्रस्व (लघु) या दीर्घ स्वर मिलकर एक दीर्घ स्वर बन जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब 'अ', 'आ', 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ', 'ऋ' के बाद वही ह्रस्व या दीर्घ स्वर आता है, तो दोनों मिलकर क्रमशः 'आ', 'ई', 'ऊ', 'ॠ' हो जाते हैं।

इसे इस प्रकार समझा जा सकता है:

 अ + अ = आ

 अ + आ = आ

 आ + अ = आ

 आ + आ = आ

 इ + इ = ई

 इ + ई = ई

 ई + इ = ई

 ई + ई = ई

 उ + उ = ऊ

 उ + ऊ = ऊ

 ऊ + उ = ऊ

 ऊ + ऊ = ऊ

 ऋ + ऋ = ॠ (यह संस्कृत में अधिक प्रयुक्त होती है, हिंदी में इसके उदाहरण कम मिलते हैं)

चलिए, अब इसे 20 उदाहरणों के साथ समझते हैं:

अ/आ के उदाहरण:

 वेद + अंत = वेदांत (अ + अ = आ)

    यहाँ 'वेद' के अंत में 'अ' और 'अंत' के आरंभ में 'अ' मिलकर 'आ' बन गए।

धर्म + अर्थ = धर्मार्थ (अ + अ = आ)

'धर्म' के 'अ' और 'अर्थ' के 'अ' का मेल होकर 'आ' बन गया।

स्व + अर्थी = स्वार्थी (अ + अ = आ)

'स्व' के 'अ' और 'अर्थी' के 'अ' मिलकर 'आ' बन गए।

पुस्तक + आलय = पुस्तकालय (अ + आ = आ)

'पुस्तक' के 'अ' और 'आलय' के 'आ' मिलकर 'आ' बन गए।

हिम + आलय = हिमालय (अ + आ = आ)

'हिम' के 'अ' और 'आलय' के 'आ' मिलकर 'आ' बन गए।

भोजन + आलय = भोजनालय (अ + आ = आ)

'भोजन' के 'अ' और 'आलय' के 'आ' मिलकर 'आ' बन गए।

विद्या + अर्थी = विद्यार्थी (आ + अ = आ)

'विद्या' के 'आ' और 'अर्थी' के 'अ' मिलकर 'आ' बन गए।

महा + आत्मा = महात्मा (आ + आ = आ)

'महा' के 'आ' और 'आत्मा' के 'आ' मिलकर 'आ' बन गए।

दया + आनंद = दयानंद (आ + आ = आ)

'दया' के 'आ' और 'आनंद' के 'आ' मिलकर 'आ' बन गए।

परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी (आ + अ = आ)

'परीक्षा' के 'आ' और 'अर्थी' के 'अ' मिलकर 'आ' बन गए।

इ/ई के उदाहरण:

कवि + इंद्र = कवींद्र (इ + इ = ई)

'कवि' के 'इ' और 'इंद्र' के 'इ' मिलकर 'ई' बन गए।

गिरि + ईश = गिरीश (इ + ई = ई)

'गिरि' के 'इ' और 'ईश' के 'ई' मिलकर 'ई' बन गए।

मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर (इ + ई = ई)

'मुनि' के 'इ' और 'ईश्वर' के 'ई' मिलकर 'ई' बन गए।

मही + इंद्र = महींद्र (ई + इ = ई)

'मही' के 'ई' और 'इंद्र' के 'इ' मिलकर 'ई' बन गए।

नदी + ईश = नदीश (ई + ई = ई)

'नदी' के 'ई' और 'ईश' के 'ई' मिलकर 'ई' बन गए।

उ/ऊ के उदाहरण:

भानु + उदय = भानूदय (उ + उ = ऊ)

'भानु' के 'उ' और 'उदय' के 'उ' मिलकर 'ऊ' बन गए।

विधु + उदय = विधूदय (उ + उ = ऊ)

'विधु' के 'उ' और 'उदय' के 'उ' मिलकर 'ऊ' बन गए।

लघु + ऊर्मि = लघूर्मि (उ + ऊ = ऊ)

'लघु' के 'उ' और 'ऊर्मि' के 'ऊ' मिलकर 'ऊ' बन गए।

वधू + उत्सव = वधूत्सव (ऊ + उ = ऊ)

'वधू' के 'ऊ' और 'उत्सव' के 'उ' मिलकर 'ऊ' बन गए।

भू + ऊर्जा = भूर्जा (ऊ + ऊ = ऊ)

'भू' के 'ऊ' और 'ऊर्जा' के 'ऊ' मिलकर 'ऊ' बन गए।

इस प्रकार, दीर्घ स्वर संधि में समान स्वरों के मिलने से उनके दीर्घ रूप का निर्माण होता है।


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