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मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025" के लिए गुण स्वर संधि को समझना आपके लिए महत्वपूर्ण होगा। यहाँ इसे 20 उदाहरणों के साथ विस्तारपूर्वक समझाया गया है:

गुण स्वर संधि (Guna Swar Sandhi): मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 हेतु विस्तृत विवरण

परिचय:

संधि का अर्थ है "मेल" या "जोड़"। व्याकरण में, दो वर्णों के मेल से होने वाले परिवर्तन को संधि कहते हैं। स्वर संधि, संधि का एक प्रकार है जहाँ दो स्वरों के मेल से परिवर्तन होता है। गुण स्वर संधि, स्वर संधि के पाँच प्रमुख भेदों में से एक है।

गुण स्वर संधि क्या है?

गुण स्वर संधि तब होती है जब 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई', 'उ' या 'ऊ', या 'ऋ' स्वर आता है। इसके परिणामस्वरूप एक नया "गुण" स्वर बनता है।

नियम:

अ/आ + इ/ई = ए (e)

जब 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आता है, तो दोनों मिलकर 'ए' बन जाते हैं। 'ए' की मात्रा (े) होती है।

अ/आ + उ/ऊ = ओ (o)

 जब 'अ' या 'आ' के बाद 'उ' या 'ऊ' आता है, तो दोनों मिलकर 'ओ' बन जाते हैं। 'ओ' की मात्रा (ो) होती है।

अ/आ + ऋ = अर् (ar)

जब 'अ' या 'आ' के बाद 'ऋ' आता है, तो दोनों मिलकर 'अर्' बन जाते हैं। 'अर्' की ध्वनि प्रायः रेफ (र्) के रूप में अगले वर्ण पर लगती है।

पहचान के मुख्य बिंदु:

गुण संधि से बने शब्दों में अक्सर 'ए' (े) या 'ओ' (ो) की मात्रा देखने को मिलती है।

'अर्' वाले शब्द थोड़े कम होते हैं, लेकिन उनमें 'र' ध्वनि की प्रधानता होती है (जैसे देवर्षि)।

गुण स्वर संधि के 20 उदाहरण:

नियम 1: अ/आ + इ/ई = ए

देव + इंद्र = देवेंद्र (अ + इ = ए)

यहाँ 'व' में 'अ' स्वर है और 'इंद्र' का पहला स्वर 'इ' है, दोनों मिलकर 'ए' बने।

सुर + इंद्र = सुरेंद्र (अ + इ = ए)

नर + इंद्र = नरेंद्र (अ + इ = ए)

शुभ + इच्छा = शुभेच्छा (अ + इ = ए)

भारत + इंदु = भारतेन्दु (अ + इ = ए)

गण + ईश = गणेश (अ + ई = ए)

'ण' में 'अ' स्वर और 'ईश' का 'ई', दोनों मिलकर 'ए' बने।

परम + ईश्वर = परमेश्वर (अ + ई = ए)

कमल + ईश = कमलेश (अ + ई = ए)

महा + इंद्र = महेंद्र (आ + इ = ए)

'हा' में 'आ' स्वर और 'इंद्र' का 'इ', दोनों मिलकर 'ए' बने।

यथा + इष्ट = यथेष्ट (आ + इ = ए)

राजा + इंद्र = राजेंद्र (आ + इ = ए)

रम + ईश = रमेश (अ + ई = ए)

(यह अक्सर लोग "रमा + ईश" सोचते हैं, लेकिन शब्द "रम" का अर्थ "मनोरंजन करना" या "आनंद लेना" होता है, इसलिए "रमेश" का अर्थ "रम का ईश" अर्थात् "आनंद का स्वामी" - विष्णु होता है।)

रमा + ईश = रमेश (आ + ई = ए)

(यह अधिक प्रचलित और व्याकरणिक रूप से सही उदाहरण है।)

नियम 2: अ/आ + उ/ऊ = ओ

वीर + उचित = विरोचित (अ + उ = ओ)

'र' में 'अ' स्वर और 'उचित' का 'उ', दोनों मिलकर 'ओ' बने।

पर + उपकार = परोपकार (अ + उ = ओ)

सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ = ओ)

महा + उत्सव = महोत्सव (आ + उ = ओ)

'हा' में 'आ' स्वर और 'उत्सव' का 'उ', दोनों मिलकर 'ओ' बने।

गंगा + उदक = गंगोदक (आ + उ = ओ)

जल + ऊर्मि = जलोर्मि (अ + ऊ = ओ)

'ल' में 'अ' स्वर और 'ऊर्मि' का 'ऊ', दोनों मिलकर 'ओ' बने।

महा + ऊर्जा = महोर्जा (आ + ऊ = ओ)

नियम 3: अ/आ + ऋ = अर्

देव + ऋषि = देवर्षि (अ + ऋ = अर्)

'व' में 'अ' स्वर और 'ऋषि' का 'ऋ', दोनों मिलकर 'अर्' बने। 'र' की ध्वनि अगले वर्ण 'ष' पर रेफ (र्) के रूप में लगी।

महा + ऋषि = महर्षि (आ + ऋ = अर्)

सप्त + ऋषि = सप्तर्षि (अ + ऋ = अर्)

ब्रह्म + ऋषि = ब्रह्मर्षि (अ + ऋ = अर्)

राजा + ऋषि = राजर्षि (आ + ऋ = अर्)

परीक्षा की तैयारी हेतु सुझाव:

नियमों को रटें नहीं, समझें: केवल नियम याद करने से बेहतर है कि आप यह समझें कि स्वरों का मेल किस प्रकार हो रहा है।

उदाहरणों का अभ्यास करें: जितने अधिक उदाहरणों का आप अभ्यास करेंगे, उतनी ही आपकी पहचान मजबूत होगी।

विच्छेद करना सीखें: संधि किए हुए शब्द का सही विच्छेद करना भी महत्वपूर्ण है। यह आपको संधि के नियमों को समझने में मदद करेगा।

अन्य संधि भेदों से तुलना करें: दीर्घ, वृद्धि, यण और अयादि संधि के नियमों को भी समझें ताकि आप उनमें अंतर कर सकें।

लिखित अभ्यास करें: केवल पढ़ने से नहीं, बल्कि लिखकर भी अभ्यास करें।

गुण स्वर संधि हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग है और प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जा सकते हैं। उपरोक्त विस्तृत विवरण और उदाहरणों की सहायता से आप इस विषय पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं।


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