यण स्वर संधि और अयादि स्वर संधि
(मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 हेतु विस्तृत व्याख्या)
मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में हिंदी व्याकरण, विशेषकर 'संधि' से संबंधित प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यण स्वर संधि और अयादि स्वर संधि, स्वर संधि के प्रमुख भेद हैं, जिन्हें उदाहरणों सहित समझना परीक्षार्थियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
1. यण स्वर संधि (Yan Swar Sandhi)
परिभाषा:
जब इ / ई, उ / ऊ, या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तब ये क्रमशः 'य्', 'व्' और 'र्' में परिवर्तित हो जाते हैं। यही परिवर्तन यण स्वर संधि कहलाता है।
नियम:
| मूल स्वर | परिवर्तन |
|---|---|
| इ / ई + भिन्न स्वर | य् |
| उ / ऊ + भिन्न स्वर | व् |
| ऋ + भिन्न स्वर | र् |
उदाहरणों सहित व्याख्या:
(क) इ / ई + भिन्न स्वर = य्
- अति + अधिक = अत्यधिक
- इति + आदि = इत्यादि
- प्रति + एक = प्रत्येक
- नदी + अर्पण = नद्यर्पण
- देवी + आगमन = देव्यागमन
- अति + उत्तम = अत्युत्तम
(ख) उ / ऊ + भिन्न स्वर = व्
- सु + आगत = स्वागत
- अनु + एषण = अन्वेषण
- मधु + आलय = मध्वालय
- वधू + आगमन = वध्वागमन
- गुरु + ओदन = गुर्वोदन
(ग) ऋ + भिन्न स्वर = र्
- पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
- मातृ + इच्छा = मातृच्छा
- भ्रातृ + उपदेश = भ्रात्रुपदेश
पहचान के तरीके:
- शब्द में ‘य’, ‘व’ या ‘र’ के ठीक पहले कोई आधा व्यंजन दिखाई देता है।
उदाहरण:- अत्यधिक → (त्य)
- स्वागत → (ग्व)
- पित्राज्ञा → (त्रा)
2. अयादि स्वर संधि (Ayadi Swar Sandhi)
परिभाषा:
जब ए, ऐ, ओ या औ के बाद भिन्न स्वर आता है, तब उनका क्रमशः 'अय', 'आय', 'अव', 'आव' में परिवर्तन हो जाता है। इस प्रकार की संधि अयादि स्वर संधि कहलाती है।
नियम:
| मूल स्वर | परिवर्तन |
|---|---|
| ए + भिन्न स्वर | अय् |
| ऐ + भिन्न स्वर | आय् |
| ओ + भिन्न स्वर | अव् |
| औ + भिन्न स्वर | आव् |
उदाहरणों सहित व्याख्या:
(क) ए + भिन्न स्वर = अय्
- ने + अन = नयन
- शे + अन = शयन
- चे + अन = चयन
(ख) ऐ + भिन्न स्वर = आय्
- गै + अक = गायक
- नै + अक = नायक
- गै + इका = गायिका
(ग) ओ + भिन्न स्वर = अव्
- पो + अन = पवन
- भो + अन = भवन
- पो + इत्र = पवित्र
(घ) औ + भिन्न स्वर = आव्
- पौ + अक = पावक
- नौ + इक = नाविक
- भौ + उक = भावुक
पहचान के तरीके:
- अयादि संधि में 'अय', 'आय', 'अव', 'आव' ध्वनियाँ स्पष्ट रूप से सुनाई देती हैं।
- इन शब्दों में आधा व्यंजन प्रायः नहीं होता, जैसे:
- नयन
- गायक
- पवन
- पावक
परीक्षा हेतु विशेष टिप्स:
✅ यण और अयादि स्वर संधि के नियम स्पष्ट रूप से याद करें।
✅ विच्छेद और संधि निर्माण का नियमित अभ्यास करें।
✅ दोनों में अंतर समझें:
- यण संधि में ‘य’, ‘व’, ‘र’ के पहले आधा व्यंजन
- अयादि संधि में ‘अय’, ‘आय’, ‘अव’, ‘आव’ की ध्वनि स्पष्ट
🔖 निष्कर्ष:
यण और अयादि स्वर संधि हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण भाग हैं। इनकी समझ और अभ्यास से संधि पर आधारित प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सकता है।
📘 शुभकामनाएँ!
आपका अध्ययन सफलता की ओर अग्रसर हो! 💐✍️

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