17th Day । सामाजिक विज्ञान

🔶 इकाई - 18: इतिहास (History)
विषय: सोलह महाजनपद एवं मगध का उत्कर्ष
(मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 हेतु विस्तारपूर्वक व्याख्या)


🏛️ सोलह महाजनपद (Sixteen Mahajanapadas)

📌 परिचय:

वेदकालीन समाज में प्रारंभिक राजनीतिक इकाइयाँ जन (tribes) कहलाती थीं। समय के साथ जन का विकास जनपद और आगे चलकर महाजनपदों के रूप में हुआ।
महाजनपद का अर्थ है – “महान जनों का प्रदेश”

🗺️ सोलह महाजनपदों की सूची:

(छठी शताब्दी ई.पू. में अस्तित्व में)

क्रम महाजनपद प्रमुख क्षेत्र (आधुनिक राज्य)
1 अंग बिहार का भागलपुर क्षेत्र
2 मगध दक्षिणी बिहार
3 काशी वाराणसी क्षेत्र
4 कोशल पूर्वी उत्तर प्रदेश
5 वज्जि (वृज्जि) वैशाली और उसके आसपास
6 मल्ल गोरखपुर क्षेत्र
7 चेदि मध्य प्रदेश (दमोह, सतना)
8 वत्स प्रयाग (इलाहाबाद)
9 कुरु हरियाणा, दिल्ली
10 पांचाल पश्चिमी यूपी
11 अश्मक महाराष्ट्र का गोदावरी क्षेत्र
12 अवंति मालवा (उज्जैन और आसपास)
13 गांधार रावलपिंडी और पेशावर (पाकिस्तान)
14 काम्बोज अफगानिस्तान का उत्तर-पूर्वी भाग
15 सुरसेन मथुरा क्षेत्र
16 मत्स्य जयपुर-आगरा क्षेत्र

📚 प्रमुख विशेषताएँ:

  • इनमें से अधिकांश महाजनपदों का वर्णन बौद्ध ग्रंथ ‘अंगुत्तर निकाय’ में मिलता है।
  • वज्जि महासंघ एक गणतांत्रिक महाजनपद था – यहाँ जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा शासन चलता था।
  • अधिकतर महाजनपदों की राजधानियाँ नगरयुक्त थीं – जैसे मगध की राजधानी राजगृह, बाद में पाटलिपुत्र।

🏹 मगध का उत्कर्ष (Rise of Magadha)

📌 मगध का महत्त्व:

सोलह महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली और समृद्ध महाजनपद मगध बना, जिसने अंततः भारत के एक बड़े भूभाग पर शासन किया।


🏰 मगध के उत्कर्ष के कारण:

कारण विवरण
🔹 भौगोलिक स्थिति गंगा, सोन जैसी नदियों के मध्य उपजाऊ क्षेत्र
🔹 खनिज संसाधन लोहे की उपलब्धता – शस्त्र निर्माण हेतु
🔹 सामरिक स्थिति प्राकृतिक सुरक्षा – पर्वत व नदियाँ
🔹 कुशल शासक बुद्धिमान व शक्तिशाली राजा
🔹 सैन्य शक्ति संगठित सेना व हथियार

👑 मगध के प्रमुख शासक व राजवंश:

🔶 1. हर्यंक वंश (600–413 ई.पू.):

  • बिंबिसार (राजधानी: राजगृह)
    ➤ समकालीन: महावीर व गौतम बुद्ध
    ➤ विवाह संबंधों के माध्यम से पड़ोसी राज्यों से मैत्री
  • अजातशत्रु
    ➤ बिंबिसार का पुत्र
    ➤ वज्जि संघ पर विजय प्राप्त की
    ➤ पाटलिपुत्र की स्थापना

🔶 2. शिशुनाग वंश (413–345 ई.पू.):

  • शिशुनाग
    ➤ वत्स, अवध और अवंति को मगध में मिलाया
    ➤ राजधानी – राजगृह और फिर पाटलिपुत्र
  • कालाशोक
    ➤ द्वितीय बौद्ध संगीति (वैशाली में)

🔶 3. नंद वंश (345–321 ई.पू.):

  • महापद्म नंद
    "एकराट" (एकमात्र सम्राट) कहा गया
    ➤ क्षत्रियों का नाश कर मगध का विस्तार किया
    ➤ अत्यंत धनी – "नंदों की गुप्त तिजोरी प्रसिद्ध थी"

📘 मगध के उत्कर्ष का ऐतिहासिक महत्त्व:

  • मगध ने ही आगे चलकर मौर्य साम्राज्य की नींव रखी (चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा)।
  • यह भारत की प्रथम सुसंगठित साम्राज्यवादी शक्ति बनी।
  • पाटलिपुत्र भारत का प्रथम राजनीतिक-सांस्कृतिक केंद्र बना।

🧠 स्मरणीय तथ्य (Facts to Remember):

प्रश्न उत्तर
बौद्ध ग्रंथ में सोलह महाजनपद कहाँ वर्णित हैं? अंगुत्तर निकाय
सबसे शक्तिशाली महाजनपद कौन-सा था? मगध
वज्जि एक कैसा राज्य था? गणतंत्र
मगध की प्रारंभिक राजधानी क्या थी? राजगृह
पाटलिपुत्र की स्थापना किसने की? अजातशत्रु
नंद वंश का संस्थापक कौन था? महापद्म नंद

📝 निष्कर्ष (Conclusion):

  • सोलह महाजनपदों ने भारत के प्रारंभिक राजनीतिक विकास को दिशा दी।
  • मगध का उत्कर्ष भारतीय इतिहास की केंद्रीय धारा बन गया, जिससे आगे चलकर मौर्य, गुप्त जैसे महान साम्राज्य विकसित हुए।


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