नमस्ते! मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के लिए, इतिहास विषय के अंतर्गत 'प्राचीन भारतीय राजवंश' एक महत्वपूर्ण खंड है। आइए इन राजवंशों को विस्तारपूर्वक और परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तथ्यों और उदाहरणों के साथ समझते हैं।
इकाई 18: प्राचीन भारतीय राजवंश
ये राजवंश भारतीय इतिहास के वह स्तंभ हैं, जिन्होंने भारतीय सभ्यता, संस्कृति, कला और प्रशासन की नींव रखी। हम इन्हें कालक्रमानुसार (chronological order) और भौगोलिक आधार पर देखेंगे।
उत्तर भारत के प्रमुख राजवंश
1. हर्यक वंश (Haryanka Dynasty)
- काल: लगभग 544 ईसा पूर्व से 412 ईसा पूर्व।
- संस्थापक: बिंबिसार।
- प्रमुख शासक:
- बिंबिसार: मगध साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक। इसने वैवाहिक संबंधों और विजय के माध्यम से अपने साम्राज्य का विस्तार किया। इसकी राजधानी राजगृह थी।
- अजातशत्रु: बिंबिसार का पुत्र। इसने बुद्ध और महावीर दोनों के समकालीन होने का गौरव प्राप्त किया। इसने मगध की शक्ति को और बढ़ाया।
- उदायिन: अजातशत्रु का पुत्र। इसने पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) नामक शहर की स्थापना की और उसे राजधानी बनाया।
- मुख्य बिंदु: इस वंश के शासनकाल में मगध एक शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उभरा।
2. शिशुनाग वंश (Shishunaga Dynasty)
- काल: 412 ईसा पूर्व से 345 ईसा पूर्व।
- संस्थापक: शिशुनाग।
- प्रमुख शासक:
- शिशुनाग: हर्यक वंश को समाप्त कर मगध की गद्दी पर बैठा। इसने अवंति राज्य को जीतकर मगध में मिलाया।
- कालाशोक (काकवर्ण): शिशुनाग का पुत्र। इसके शासनकाल में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन वैशाली में हुआ था।
- मुख्य बिंदु: इस वंश ने मगध के विस्तार को जारी रखा।
3. मौर्य वंश (Maurya Dynasty)
- काल: 322 ईसा पूर्व से 185 ईसा पूर्व।
- संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य।
- प्रमुख शासक:
- चंद्रगुप्त मौर्य: चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से नंद वंश को समाप्त कर भारत का पहला विशाल साम्राज्य स्थापित किया। इसने सेल्यूकस निकेटर को हराया।
- अशोक महान: चंद्रगुप्त मौर्य का पोता और इस वंश का सबसे प्रतापी शासक।
- उदाहरण: कलिंग युद्ध के बाद इसने हिंसा को त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया। इसने धम्म (धर्म) का प्रचार किया।
- उदाहरण: अशोक के शिलालेख और स्तंभलेख (जैसे सारनाथ का अशोक स्तंभ) भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य हैं। साँची का प्रसिद्ध स्तूप भी इसी काल में बना था।
- मुख्य बिंदु: यह भारत का पहला अखिल-भारतीय साम्राज्य था, जिसका विस्तार अफगानिस्तान से लेकर कर्नाटक तक था। इसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी।
4. कुषाण वंश (Kushan Dynasty)
- काल: पहली शताब्दी ईस्वी से तीसरी शताब्दी ईस्वी तक।
- संस्थापक: कुजुल कडफिसेस।
- प्रमुख शासक:
- कनिष्क: इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक।
- उदाहरण: इसने शक संवत (78 ईस्वी) की शुरुआत की, जिसका उपयोग आज भी भारत सरकार करती है।
- उदाहरण: इसके शासनकाल में चतुर्थ बौद्ध संगीति का आयोजन कश्मीर के कुंडलवन में हुआ था।
- उदाहरण: कला के क्षेत्र में, गांधार कला शैली (जिसमें यूनानी और भारतीय कला का मिश्रण है) इसी काल में विकसित हुई।
- कनिष्क: इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक।
- मुख्य बिंदु: कुषाणों का साम्राज्य मध्य एशिया से लेकर उत्तर भारत तक फैला हुआ था। इसने सिल्क रूट (रेशम मार्ग) पर नियंत्रण किया, जिससे व्यापारिक समृद्धि आई।
5. गुप्त वंश (Gupta Dynasty)
- काल: लगभग 319 ईस्वी से 540 ईस्वी।
- संस्थापक: श्रीगुप्त।
- प्रमुख शासक:
- समुद्रगुप्त: गुप्त वंश का सबसे महान शासक, जिसे 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है।
- चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य): इसके दरबार में कालिदास जैसे महान कवि और आर्यभट्ट जैसे गणितज्ञ थे।
- मुख्य बिंदु: इस काल को 'भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग' कहा जाता है।
- उदाहरण: वैज्ञानिक प्रगति: आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया और पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने की बात कही।
- उदाहरण: कला और स्थापत्य: अजंता और एलोरा की गुफाओं की चित्रकला और वास्तुकला इसी काल की देन है।
- उदाहरण: साहित्य: संस्कृत साहित्य का अभूतपूर्व विकास हुआ।
6. वर्धन वंश (Vardhan Dynasty)
- काल: 606 ईस्वी से 647 ईस्वी।
- संस्थापक: पुष्यभूति।
- प्रमुख शासक:
- हर्षवर्धन (हर्ष): इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक।
- उदाहरण: चीनी यात्री ह्वेनसांग इसके दरबार में आया था और उसने इसकी शासन व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है।
- उदाहरण: हर्ष एक महान विद्वान भी था, जिसने नागानंद, रत्नावली, और प्रियदर्शिका नामक तीन नाटक लिखे।
- हर्षवर्धन (हर्ष): इस वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक।
- मुख्य बिंदु: यह अंतिम महान हिंदू सम्राट था जिसने उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। इसकी राजधानी कन्नौज थी।
दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश
7. पल्लव वंश (Pallava Dynasty)
- काल: छठी से नौवीं शताब्दी ईस्वी।
- क्षेत्र: कांचीपुरम (कांची) के आसपास का तमिलनाडु क्षेत्र।
- संस्थापक: सिंहविष्णु।
- प्रमुख शासक:
- महेंद्रवर्मन प्रथम और नरसिंहवर्मन प्रथम।
- मुख्य बिंदु:
- उदाहरण: पल्लव वंश अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर महाबलीपुरम के रथ मंदिर और शोर मंदिर, जो चट्टानों को काटकर बनाए गए थे।
- पल्लवों और चालुक्यों के बीच सत्ता के लिए लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा।
8. चालुक्य वंश (Chalukya Dynasty)
- काल: छठी से बारहवीं शताब्दी ईस्वी।
- क्षेत्र: कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का बड़ा हिस्सा।
- संस्थापक: पुलकेशिन् I (वादामी के चालुक्य)।
- प्रमुख शासक:
- पुलकेशिन् द्वितीय: सबसे शक्तिशाली शासक।
- उदाहरण: इसने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर हराया था।
- पुलकेशिन् द्वितीय: सबसे शक्तिशाली शासक।
- मुख्य बिंदु:
- उदाहरण: चालुक्य मंदिर वास्तुकला के महान संरक्षक थे। वादामी, ऐहोल और पट्टदकल में इनके प्रसिद्ध मंदिर हैं।
9. चोल वंश (Chola Dynasty)
- काल: नौवीं से तेरहवीं शताब्दी ईस्वी। (हालाँकि, प्रारंभिक चोल वंश भी था)।
- क्षेत्र: तमिलनाडु।
- संस्थापक: विजयालय।
- प्रमुख शासक:
- राजाराज I:
- उदाहरण: इसने तंजौर में प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर (राजराजेश्वर मंदिर) का निर्माण कराया।
- राजेंद्र I:
- उदाहरण: इसने अपनी नौसेना के बल पर श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे मलेशिया) तक विजय प्राप्त की थी।
- राजाराज I:
- मुख्य बिंदु:
- चोल वंश अपनी शक्तिशाली स्थानीय स्वशासन (ग्राम सभाएँ) और नौसेना के लिए प्रसिद्ध था।
- चोल कला में नटराज की कांस्य प्रतिमाएँ विश्व प्रसिद्ध हैं।
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