स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय आंदोलन | MP Police Exam

एमपी पुलिस परीक्षा 2025 हेतु स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय आंदोलन”
यह इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिससे हर साल परीक्षा में 3–5 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं।
यह सामग्री एमपी पुलिस, एमपीएससी, पटवारी, तथा शिक्षक भर्ती जैसी सभी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है।


🏵️ स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्रीय आंदोलन (1857 – 1947)


🔶 प्रस्तावना

भारत का स्वतंत्रता संग्राम विश्व इतिहास की सबसे लम्बी और अद्भुत जन–क्रांतियों में से एक था।
लगभग दो शताब्दियों (1757 से 1947) तक ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत पर शासन किया।
लेकिन भारतीय जनता ने इस दासता के विरुद्ध अनेक रूपों में संघर्ष किया—
कभी विद्रोह के रूप में, कभी असहयोग के रूप में, और कभी अहिंसक जनआंदोलन के रूप में।

यह आंदोलन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं था,
बल्कि यह भारतीयों की आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, और सांस्कृतिक पुनर्जागृति का प्रतीक भी था।


🔶 ब्रिटिश शासन की पृष्ठभूमि

1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन

  • 1600 ई. में इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार की अनुमति दी।
  • 1613 में कंपनी ने सूरत में पहला कारखाना (Factory) खोला।
  • धीरे-धीरे कंपनी ने बंगाल, मद्रास, बंबई आदि में अपने केंद्र स्थापित किए।

2. अंग्रेजों का शासन स्थापित होना

  • 1757 ई. – प्लासी का युद्ध (अलीवर्दी खाँ के उत्तराधिकारी सिराजुद्दौला और रॉबर्ट क्लाइव के बीच)
    → अंग्रेजों की पहली राजनीतिक विजय, बंगाल पर नियंत्रण।
  • 1764 – बक्सर का युद्ध (मीर कासिम, शाह आलम द्वितीय, शुजाउद्दौला बनाम कंपनी)
    → कंपनी को बंगाल, बिहार, उड़ीसा की दीवानी अधिकार प्राप्त हुए।

इसके बाद अंग्रेज धीरे-धीरे पूरे भारत में अपना साम्राज्य फैला लेते हैं।


🔶 स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चरण

भारत का स्वतंत्रता संघर्ष तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

चरण अवधि स्वरूप
प्रथम चरण 1857 – 1885 सशस्त्र एवं असंगठित विद्रोह
द्वितीय चरण 1885 – 1919 प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन (मृदु राष्ट्रवाद)
तृतीय चरण 1919 – 1947 गांधी युग एवं जनआंदोलन का चरण

🪔 प्रथम चरण: 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम

1. पृष्ठभूमि

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष धीरे-धीरे बढ़ रहा था —

  • सैनिकों में असमानता और वेतन भेदभाव।
  • सामाजिक–धार्मिक हस्तक्षेप (जैसे सती प्रथा, बाल विवाह, धर्मांतरण की अफवाहें)।
  • आर्थिक शोषण और किसानों पर करों का बोझ।
  • सामंतों और राजाओं से राज्य छीनने की "Doctrine of Lapse" नीति।

2. तात्कालिक कारण

  • एनफील्ड राइफल कारतूस कांड (1857) — कारतूसों पर गाय और सूअर की चर्बी की अफवाह फैली।
    इससे हिंदू और मुस्लिम सैनिक दोनों आहत हुए।
  • मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को विद्रोह भड़क उठा।

3. प्रमुख केंद्र

क्षेत्र प्रमुख नेता
दिल्ली बहादुरशाह ज़फर (प्रतीक नेता)
कानपुर नाना साहेब, तात्या टोपे
झाँसी रानी लक्ष्मीबाई
लखनऊ बेगम हज़रत महल
बिहार कुंवर सिंह
फैज़ाबाद अहमदुल्लाह शाह

4. परिणाम

  • विद्रोह असफल रहा क्योंकि —
    संगठन की कमी, आधुनिक हथियारों का अभाव, अंग्रेजों की बेहतर सैन्य शक्ति।
  • परंतु इसने भारतीय समाज में राष्ट्रीयता की चेतना जगाई।
  • ब्रिटिश सरकार ने 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया,
    और शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (राजा/रानी) के अधीन कर दिया गया।

🪔 द्वितीय चरण: प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन (1885 – 1919)

1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (INC)

  • स्थापना: 28 दिसंबर 1885, बंबई
  • संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम (Allan Octavian Hume)
  • प्रथम अध्यक्ष: वोमेश चंद्र बनर्जी

2. उदारवादी नेता (Moderates)

मुख्य नेता — दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी।
मुख्य मांगें:

  • विधायिकाओं में भारतीयों की भागीदारी,
  • सरकारी नौकरियों में समान अवसर,
  • देशी उद्योगों को प्रोत्साहन,
  • भारत में उच्च शिक्षण संस्थान।

नीति: संवैधानिक और शांतिपूर्ण विरोध।

3. उग्रवादी नेता (Extremists)

मुख्य नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिनचंद्र पाल (लाल-बाल-पाल त्रिमूर्ति)।
नीति: स्वदेशी, बहिष्कार, स्वराज्य, राष्ट्रीय शिक्षा, और आत्मनिर्भरता।
नारा:स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।

4. बंग-भंग (1905)

  • लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया —
    कारण: प्रशासनिक सुविधा बताया गया, पर वास्तविक उद्देश्य “फूट डालो और राज करो”
  • परिणाम: स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन।
  • लोगों ने विदेशी वस्त्र जलाए, राष्ट्रीय विद्यालय खोले, और स्वदेशी उद्योग शुरू किए।

5. मुस्लिम लीग की स्थापना (1906)

  • स्थापना: ढाका में, अध्यक्ष आगा खान
  • उद्देश्य: मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा।
  • धीरे-धीरे यह संगठन सांप्रदायिक राजनीति का केंद्र बन गया।

🪔 तृतीय चरण: गांधी युग (1919 – 1947)

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने राजनीति को जन-आंदोलन में बदला।
उनकी नीति थी — अहिंसा, सत्य, और असहयोग


⚜️ 1. गांधीजी का भारत आगमन

  • 9 जनवरी 1915 को गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
  • उन्होंने पहले कुछ छोटे आंदोलनों से शुरुआत की —
    • चंपारण आंदोलन (1917) – नील की खेती करने वाले किसानों की मदद।
    • खेड़ा आंदोलन (1918) – गुजरात के किसानों का कर माफी संघर्ष।
    • अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) – मजदूरों के वेतन हेतु सफल सत्याग्रह।

⚜️ 2. रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)

  • ब्रिटिश सरकार ने "रॉलेट एक्ट" पास किया —
    बिना मुकदमे गिरफ्तारी की अनुमति।
  • गांधीजी ने देशभर में विरोध किया।
  • 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी) को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोली चलवाई।
    → हजारों लोग मारे गए।
    यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का टर्निंग पॉइंट बनी।

⚜️ 3. असहयोग आंदोलन (1920 – 22)

  • उद्देश्य: ब्रिटिश शासन का शांतिपूर्ण असहयोग।
  • कदम: विदेशी वस्त्र बहिष्कार, सरकारी नौकरियों, स्कूलों, और अदालतों से त्याग।
  • नेता: गांधीजी, मौलाना आज़ाद, चित्तरंजन दास, लाला लाजपत राय।
  • चौरी-चौरा कांड (1922) में हिंसा के कारण गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।

⚜️ 4. साइमन कमीशन (1927)

  • ब्रिटिश सरकार ने भारत की संवैधानिक सुधारों की समीक्षा हेतु "साइमन कमीशन" भेजा।
  • इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था।
  • देशभर में नारा उठा —
    “Simon Go Back”
  • प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

⚜️ 5. नमक सत्याग्रह / दांडी मार्च (1930)

  • 12 मार्च 1930, गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी (गुजरात) तक 240 मील की यात्रा की।
  • उद्देश्य: ब्रिटिश नमक कानून का विरोध।
  • यह आंदोलन भारत की जनभागीदारी का प्रतीक बना।

⚜️ 6. गोलमेज सम्मेलन (1930–32)

  • लंदन में भारत के संविधान पर विचार के लिए सम्मेलन हुए।
  • गांधीजी ने केवल दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया।
  • कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।

⚜️ 7. 1935 का भारत सरकार अधिनियम

  • भारतीयों को प्रांतीय स्वशासन का अधिकार दिया गया।
  • प्रांतीय विधानसभाओं में चुनाव हुए (1937)।
  • कांग्रेस ने अधिकांश प्रांतों में सरकार बनाई।

⚜️ 8. द्वितीय विश्वयुद्ध और भारत

  • 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ।
  • ब्रिटिश सरकार ने बिना भारतीयों से पूछे भारत को युद्ध में झोंक दिया।
  • कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए अपनी सरकारें त्याग दीं।
  • 1942 में “भारत छोड़ो आंदोलन” शुरू हुआ।

🔥 भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

  • गांधीजी का नारा: “अंग्रेजों भारत छोड़ो” (Quit India Movement)
  • तिथि: 8 अगस्त 1942, बंबई (ग्वालिया टैंक मैदान)।
  • गांधीजी और अन्य नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
  • लेकिन पूरे देश में जनक्रांति फैल गई।
  • यह आंदोलन अंग्रेजों के अंत की शुरुआत साबित हुआ।

🇮🇳 स्वतंत्रता की दिशा में अंतिम कदम

🔸 1. कैबिनेट मिशन योजना (1946)

  • भारत की स्वतंत्रता और संविधान निर्माण हेतु मिशन आया।
  • संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

🔸 2. अंतरिम सरकार (1946)

  • जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में बनी।

🔸 3. विभाजन की घोषणा (1947)

  • मुस्लिम लीग के अलग राष्ट्र की मांग के कारण भारत का विभाजन स्वीकार करना पड़ा।
  • 14 अगस्त 1947 – पाकिस्तान अस्तित्व में आया।
  • 15 अगस्त 1947 – भारत स्वतंत्र हुआ।

🪙 स्वतंत्र भारत का उदय

  • भारत के प्रथम गवर्नर जनरल: लॉर्ड माउंटबेटन
  • भारत के प्रथम स्वतंत्र प्रधानमंत्री: पंडित जवाहरलाल नेहरू
  • 26 जनवरी 1950 को भारत गणराज्य बना और संविधान लागू हुआ।

🔶 स्वतंत्रता संग्राम के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू

  1. पुनर्जागरण आंदोलन – राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद, ईश्वरचंद्र विद्यासागर आदि ने
    शिक्षा, स्त्री–स्वतंत्रता और समाज सुधार पर जोर दिया।

  2. प्रेस और साहित्य का योगदान
    ‘अमर उजाला’, ‘केसरी’, ‘हिंद स्वराज’, ‘यंग इंडिया’ जैसी पत्रिकाओं ने राष्ट्रवाद फैलाया।

  3. क्रांतिकारी आंदोलन
    भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस जैसे वीरों ने
    सशस्त्र क्रांति द्वारा देश को जाग्रत किया।


🪔 प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और योगदान

नाम प्रमुख योगदान
महात्मा गांधी अहिंसक आंदोलन, दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलन
जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस नेतृत्व, संविधान सभा
सरदार पटेल रियासतों का एकीकरण
सुभाष चंद्र बोस आज़ाद हिन्द फौज, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”
भगत सिंह सशस्त्र क्रांति, लाला लाजपत राय की हत्या का प्रतिशोध
रानी लक्ष्मीबाई 1857 की वीरांगना
तात्या टोपे सैन्य नेतृत्व 1857
दादाभाई नौरोजी “भारत की गरीबी” और ‘ड्रेन ऑफ वेल्थ’ सिद्धांत
गोपालकृष्ण गोखले समाज सुधार और उदारवादी नेतृत्व

🔶 स्वतंत्रता संग्राम की विशेषताएँ

  1. यह बहुस्तरीय आंदोलन था – सैनिक, किसान, विद्यार्थी, महिलाएँ, बुद्धिजीवी सभी शामिल हुए।
  2. इसने भारत को राजनीतिक एकता का बोध कराया।
  3. भारत को आर्थिक स्वावलंबन और आत्मसम्मान की भावना मिली।
  4. यह आंदोलन विश्व को अहिंसा की शक्ति का प्रमाण बना।

🔶 निष्कर्ष

भारत का स्वतंत्रता संग्राम एक दिन या एक व्यक्ति का नहीं था —
यह करोड़ों भारतीयों की आस्था, बलिदान और संघर्ष का परिणाम था।
1857 की पहली चिंगारी से लेकर 1947 के सूर्योदय तक,
हर पीढ़ी ने अपनी भूमिका निभाई।

स्वतंत्रता प्राप्ति केवल राजनीतिक विजय नहीं,
बल्कि यह “भारतीय आत्मा की पुनः स्थापना” थी।


📘 परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु पुनरावलोकन

विषय महत्वपूर्ण तथ्य
प्रथम विद्रोह 1857, मेरठ से आरंभ, बहादुरशाह ज़फर नेतृत्व
INC की स्थापना 1885, ए. ओ. ह्यूम
विभाजन बंगाल 1905, लॉर्ड कर्जन
मुस्लिम लीग 1906, ढाका
असहयोग आंदोलन 1920, चौरी-चौरा के बाद बंद
साइमन कमीशन 1927, “Simon Go Back”
नमक सत्याग्रह 1930, दांडी यात्रा
भारत छोड़ो आंदोलन 1942
स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947

🔔 निष्कर्षात्मक पंक्तियाँ

“स्वतंत्रता किसी युग की नहीं,
बल्कि हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।”

भारत का स्वतंत्रता संग्राम यह सिखाता है कि
सत्य, साहस, और एकता से कोई भी साम्राज्य स्थायी नहीं रह सकता।



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