“एमपी पुलिस परीक्षा 2025 : इतिहास – प्रमुख क्रांतियाँ और आंदोलन”।
यह भाग भारतीय इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है और परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
(यह सामग्री MP Police 2025 के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है, ताकि आप तथ्य + समझ दोनों प्राप्त कर सकें।)
भाग – 1 : प्रस्तावना
भारत का इतिहास केवल राजाओं-रानियों की कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा संघर्ष गाथा है जिसने स्वतंत्रता, समानता और आत्मसम्मान के लिए लाखों भारतीयों के बलिदान को दर्ज किया।
स्वतंत्रता की यह यात्रा अचानक नहीं हुई, बल्कि यह अनेक क्रांतियों, विद्रोहों, आंदोलनों और सामाजिक सुधारों की श्रृंखला थी।
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के विभिन्न हिस्सों में हुए आंदोलन और क्रांतियाँ स्वतंत्रता संग्राम की नींव बने।
आइए अब क्रमबद्ध रूप से इन्हें समझें।
भाग – 2 : प्रारंभिक क्रांतियाँ (1757 – 1857)
(1) प्लासी का युद्ध (1757)
- नेता: रॉबर्ट क्लाइव बनाम सिराजुद्दौला
- परिणाम: बंगाल पर ब्रिटिश नियंत्रण की शुरुआत।
- महत्व: यही से भारत में ब्रिटिश शासन की नींव रखी गई।
(2) बक्सर का युद्ध (1764)
- नेता: मीर कासिम, शुजा-उद्दौला और शाह आलम द्वितीय बनाम हैक्टर मुनरो
- परिणाम: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त की।
- महत्व: ब्रिटिश प्रशासनिक और आर्थिक प्रभुत्व का विस्तार।
(3) संथाल विद्रोह (1855–56)
- स्थान: राजमहल की पहाड़ियाँ (वर्तमान झारखंड)
- नेता: सिद्धू और कान्हू मुर्मू
- कारण: जमींदारों और अंग्रेज अधिकारियों द्वारा शोषण।
- परिणाम: विद्रोह कुचल दिया गया, लेकिन इसने आदिवासी प्रतिरोध की भावना को जन्म दिया।
(4) 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
- समय: 10 मई 1857
- प्रारंभ: मेरठ से
- नेता: मंगल पांडे, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बहादुर शाह ज़फ़र, नाना साहब आदि।
- मुख्य कारण:
- राजनैतिक कारण – ‘डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स’ नीति।
- आर्थिक कारण – किसान, कारीगर और सैनिकों का आर्थिक शोषण।
- धार्मिक कारण – कारतूसों में गाय और सुअर की चरबी की अफवाह।
- सैन्य कारण – भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव।
- परिणाम:
- यह विद्रोह असफल रहा, परंतु ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिला गया।
- 1858 में कंपनी शासन समाप्त कर भारत को ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया।
- यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का पहला संगठित प्रयास था।
भाग – 3 : सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलन (1828 – 1900)
स्वतंत्रता की चेतना के बीज सामाजिक सुधारों से उपजे।
(1) ब्रह्म समाज आंदोलन
- संस्थापक: राजा राममोहन राय (1828)
- उद्देश्य: सती प्रथा, बाल विवाह और जातिगत भेदभाव का विरोध।
- महत्व: आधुनिक भारत में सामाजिक सुधार की नींव रखी।
(2) आर्य समाज
- संस्थापक: स्वामी दयानंद सरस्वती (1875)
- नारा: "वेदों की ओर लौटो"
- योगदान: महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, और जाति प्रथा उन्मूलन।
(3) अलिगढ़ आंदोलन
- नेता: सर सैयद अहमद ख़ान
- उद्देश्य: मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देना।
- महत्व: मुस्लिम समाज में आधुनिकता का प्रवेश।
(4) थियोसोफिकल सोसाइटी
- नेता: एनी बेसेंट और मैडम ब्लावात्स्की
- उद्देश्य: भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को पुनर्जीवित करना।
(5) प्रार्थना समाज, सत्यशोधक समाज
- संस्थापक: ज्योतिराव फुले
- उद्देश्य: अछूतों, दलितों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा।
भाग – 4 : प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन (1885 – 1905)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का गठन
- स्थापना: 1885, बंबई में
- संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम
- पहले अध्यक्ष: व्योमेश चंद्र बनर्जी
- उद्देश्य: ब्रिटिश शासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना।
कांग्रेस की दो धाराएँ:
- मध्यमपंथी नेता: दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता
- नीतियाँ: याचिका, प्रार्थना, निवेदन।
- गरमपंथी नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल
- नारा: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।"
महत्वपूर्ण घटनाएँ
- 1892: भारतीय परिषद अधिनियम
- 1905: बंगाल विभाजन
भाग – 5 : क्रांतिकारी आंदोलन (1905 – 1918)
(1) बंगाल विभाजन (1905)
- किया गया: लॉर्ड कर्ज़न द्वारा
- उद्देश्य: बंगाल के हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना।
- प्रतिक्रिया:
- व्यापक विरोध और स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत।
- विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार।
(2) स्वदेशी आंदोलन
- नारा: “अपने देश का उपयोग करो, अपने देश को अपनाओ।”
- प्रमुख नेता: रवींद्रनाथ टैगोर, अरविंद घोष, बाल गंगाधर तिलक।
- महत्व: आर्थिक राष्ट्रवाद की नींव।
(3) क्रांतिकारी संगठन
- अनुशीलन समिति – बारिंद्र कुमार घोष
- अभिनव भारत – विनायक दामोदर सावरकर
- गदर पार्टी (1913) – लाला हरदयाल, अमेरिका में स्थापित।
भाग – 6 : गांधी युग (1915 – 1948)
जब महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे (1915), तब स्वतंत्रता आंदोलन ने नया रूप धारण किया।
(1) चंपारण आंदोलन (1917)
- स्थान: बिहार
- कारण: नील की जबरन खेती
- परिणाम: किसानों को राहत मिली
- महत्व: गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह।
(2) खेड़ा आंदोलन (1918)
- स्थान: गुजरात
- नेता: सरदार पटेल और गांधीजी
- कारण: अकाल के समय कर माफी की मांग।
- परिणाम: ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा।
(3) अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918)
- मुद्दा: मजदूरों की मजदूरी और कार्य-शर्तें
- महत्व: गांधीजी ने सत्याग्रह और मध्यस्थता के सिद्धांत को लागू किया।
भाग – 7 : असहयोग आंदोलन (1920 – 22)
- कारण: जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) और खिलाफत आंदोलन।
- उद्देश्य: ब्रिटिश शासन के साथ असहयोग।
- नेता: महात्मा गांधी
- प्रमुख कदम: सरकारी नौकरियाँ, स्कूल, कानून-कोर्ट का बहिष्कार।
- अंत: चौरी-चौरा हिंसा के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।
भाग – 8 : सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930 – 34)
(1) दांडी यात्रा (1930)
- स्थान: साबरमती से दांडी तक (390 किमी)
- उद्देश्य: नमक कानून का उल्लंघन।
- परिणाम: देशभर में जन-आंदोलन का रूप ले लिया।
(2) गांधी-इरविन समझौता (1931)
- परिणाम: गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए।
भाग – 9 : भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
- नारा: “अंग्रेज़ो भारत छोड़ो।”
- स्थान: बंबई से शुरुआत
- नेता: गांधीजी, नेहरू, सरदार पटेल
- विशेषता: बिना किसी पूर्व तैयारी के जनता का स्वतःस्फूर्त विद्रोह।
- परिणाम: अनेक नेताओं की गिरफ्तारी, लेकिन स्वतंत्रता की अंतिम लहर बन गई।
भाग – 10 : क्रांतिकारी गतिविधियाँ (1915 – 1945)
(1) भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव
- घटना: लाहौर षड्यंत्र केस (1929)
- नारा: “इंकलाब जिंदाबाद।”
- उद्देश्य: अंग्रेजों को झकझोरना और युवाओं को प्रेरित करना।
(2) चंद्रशेखर आजाद
- संगठन: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)
- स्थान: अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद (जहां उन्होंने आत्मबलिदान किया)।
(3) नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज
- नारा: “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”
- INA: सिंगापुर में 1943 में गठित।
- उद्देश्य: ब्रिटिशों से सशस्त्र संघर्ष द्वारा स्वतंत्रता प्राप्त करना।
भाग – 11 : स्वतंत्रता और विभाजन (1947)
- दिनांक: 15 अगस्त 1947
- वायसराय: लॉर्ड माउंटबेटन
- घोषणा: भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बने।
- नेता: जवाहरलाल नेहरू बने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री।
भाग – 12 : प्रमुख किसान और जन-आंदोलन
| आंदोलन | वर्ष | स्थान | प्रमुख नेता | उद्देश्य |
|---|---|---|---|---|
| चंपारण आंदोलन | 1917 | बिहार | गांधीजी | नील किसानों की मुक्ति |
| खेड़ा सत्याग्रह | 1918 | गुजरात | सरदार पटेल | कर माफी |
| बारदोली सत्याग्रह | 1928 | गुजरात | सरदार पटेल | लगान कमी |
| तेभागा आंदोलन | 1946 | बंगाल | किसान सभा | बटाईदारों के अधिकार |
| पाबना आंदोलन | 1873 | बंगाल | रैयत सभा | जमींदार विरोधी |
| बिरसा मुंडा आंदोलन | 1899 | झारखंड | बिरसा मुंडा | आदिवासी स्वराज |
भाग – 13 : मध्य प्रदेश में हुए प्रमुख आंदोलन
(1) भील आंदोलन
- नेता: टंट्या भील
- क्षेत्र: निमाड़, मालवा, धार, झाबुआ
- उद्देश्य: ब्रिटिश अत्याचारों और जमींदार शोषण का विरोध।
- टंट्या भील: “भारतीय रॉबिनहुड” के नाम से प्रसिद्ध।
(2) चंपारण जैसे क्षेत्रीय किसान आंदोलन (मध्य भारत)
- स्थान: जबलपुर, रीवा, सतना
- नेता: स्थानीय किसानों ने लगान और वननीति के खिलाफ संघर्ष किया।
भाग – 14 : स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक प्रतीक
- वंदे मातरम: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय
- जन गण मन: रवींद्रनाथ टैगोर
- सरफरोशी की तमन्ना: रामप्रसाद बिस्मिल
- सुभाषचंद्र बोस: “जय हिन्द”
- महात्मा गांधी: “सत्य और अहिंसा ही सबसे बड़ा हथियार है।”
भाग – 15 : निष्कर्ष
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम केवल अंग्रेजों के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष नहीं था,
बल्कि यह मानवता, सामाजिक समानता, और आत्मसम्मान के पुनर्जागरण का प्रतीक था।
1857 के विद्रोह से लेकर 1947 की आज़ादी तक —
यह यात्रा हमें सिखाती है कि संगठन, सत्य, अहिंसा और त्याग ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
परीक्षा उपयोगी सारांश (Quick Revision):
| वर्ष | आंदोलन / क्रांति | नेता | परिणाम |
|---|---|---|---|
| 1857 | प्रथम स्वतंत्रता संग्राम | मंगल पांडे, लक्ष्मीबाई | कंपनी शासन समाप्त |
| 1905 | बंगाल विभाजन | बाल गंगाधर तिलक | स्वदेशी आंदोलन |
| 1917 | चंपारण आंदोलन | गांधीजी | किसानों को राहत |
| 1920 | असहयोग आंदोलन | गांधीजी | चौरी-चौरा के बाद समाप्त |
| 1930 | सविनय अवज्ञा | गांधीजी | नमक कानून तोड़ा |
| 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन | गांधीजी, नेहरू | अंग्रेजों की नींव हिली |
| 1947 | स्वतंत्रता | नेहरू, गांधी | भारत स्वतंत्र हुआ |
0 Comments