अध्याय 1 : परिचय | MP Board एवं CBSE Board

 

Microeconomics Chapter 1 Notes

Author ✍️ R. Littey

BLOG MPSELECTIONPOINT

कक्षा 12वीं – अर्थशास्त्र (व्यष्टि अर्थशास्त्र / Microeconomics)
अध्याय 1 : परिचय (Introduction) को MP Board एवं CBSE Board परीक्षा दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक, बिंदुवार और परीक्षा-उपयोगी नोट्स के रूप में समझाया गया है।
कक्षा 12वीं व्यष्टि अर्थशास्त्र अध्याय 1 : परिचय

1. अर्थशास्त्र का अर्थ (Meaning of Economics)

अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, जो मानव की असीमित इच्छाओं और सीमित संसाधनों के बीच संबंध का अध्ययन करता है। मानव की आवश्यकताएँ असीमित हैं, जबकि संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए चयन (Choice) की समस्या उत्पन्न होती है। यही समस्या अर्थशास्त्र का मूल विषय है।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री लायनल रॉबिन्स के अनुसार –
"अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानव व्यवहार का अध्ययन करता है, जहाँ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सीमित साधनों का वैकल्पिक उपयोग किया जाता है।"

2. अर्थशास्त्र की मूल समस्याएँ (Central Problems)

(i) क्या उत्पादन किया जाए? (What to Produce?)

  • कौन-सी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पन्न की जाएँ?
  • उपभोग वस्तुएँ या पूंजी वस्तुएँ?
  • उदाहरण: अधिक मोबाइल फोन या अधिक कृषि उपकरण?

(ii) कैसे उत्पादन किया जाए? (How to Produce?)

  • श्रम-प्रधान तकनीक या पूंजी-प्रधान तकनीक?
  • संसाधनों का कुशल उपयोग कैसे हो?

(iii) किसके लिए उत्पादन किया जाए? (For Whom to Produce?)

  • उत्पादित वस्तुओं का वितरण किसे मिलेगा?
  • आय वितरण के आधार पर उपभोक्ता तय होते हैं।
📌 परीक्षा बिंदु: ये तीनों समस्याएँ हर आर्थिक प्रणाली (पूंजीवादी, समाजवादी, मिश्रित) में पाई जाती हैं।

3. व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ (Microeconomics)

व्यष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा है, जिसमें अर्थव्यवस्था की छोटी इकाइयों का अध्ययन किया जाता है। माइक्रो (Micro) का अर्थ है – छोटा। इसमें अध्ययन की इकाइयाँ हैं:
  • व्यक्तिगत उपभोक्ता
  • व्यक्तिगत उत्पादक
  • फर्म और उद्योग
  • वस्तु का मूल्य एवं व्यक्तिगत आय

4. व्यष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषाएँ

(i) प्रो. मार्शल के अनुसार – "व्यष्टि अर्थशास्त्र वह अध्ययन है जिसमें किसी एक वस्तु के मूल्य निर्धारण का विश्लेषण किया जाता है।"

(ii) प्रो. बोल्डिंग के अनुसार – "व्यष्टि अर्थशास्त्र आर्थिक तंत्र की व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन करता है।"

5. व्यष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र (Scope)

व्यष्टि अर्थशास्त्र के प्रमुख विषय निम्नलिखित हैं:
  1. उपभोक्ता व्यवहार का अध्ययन: माँग का नियम, उपयोगिता और उपभोक्ता संतुलन।
  2. उत्पादक व्यवहार का अध्ययन: उत्पादन, लागत और आपूर्ति।
  3. मूल्य निर्धारण: वस्तुओं का मूल्य और उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूंजी) का मूल्य।
  4. बाजार के प्रकार: पूर्ण प्रतियोगिता, एकाधिकार, अल्पाधिकार।

6. व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्व (Importance)

  • मूल्य निर्धारण में सहायक।
  • संसाधनों के कुशल उपयोग में सहायक।
  • सरकार के लिए नीति निर्माण (कर, सब्सिडी) में सहायक।
  • उपभोक्ता और उत्पादक की संतुष्टि और लाभ को अधिकतम करने में उपयोगी।

7. व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर

आधार व्यष्टि अर्थशास्त्र समष्टि अर्थशास्त्र
क्षेत्र छोटी इकाइयाँ पूरी अर्थव्यवस्था
उदाहरण एक वस्तु का मूल्य राष्ट्रीय आय
दृष्टिकोण सूक्ष्म व्यापक
📌 नोट: CBSE और MP Board में यह अंतर अक्सर 3 या 5 अंक में पूछा जाता है।

8. व्यष्टि अर्थशास्त्र की सीमाएँ (Limitations)

  • समग्र आर्थिक समस्याओं की उपेक्षा करना।
  • पूर्ण रोजगार जैसी अवास्तविक मान्यताओं पर आधारित होना।
  • केवल व्यक्तिगत इकाइयों पर केंद्रित होना।

9. व्यष्टि अर्थशास्त्र और संसाधनों की समस्या

व्यष्टि अर्थशास्त्र स्पष्ट करता है कि संसाधन सीमित हैं और इच्छाएँ असीमित हैं। इसलिए चयन अनिवार्य है और चयन का अर्थ ही त्याग (Opportunity Cost) होता है।

10. परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु

🔹 2 अंक के प्रश्न: व्यष्टि अर्थशास्त्र की परिभाषा, माइक्रो शब्द का अर्थ।
🔹 3–4 अंक के प्रश्न: व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्व, व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर।

11. निष्कर्ष (Conclusion)

व्यष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की आधारशिला है। इसके बिना समष्टि अर्थशास्त्र की कल्पना संभव नहीं। यह हमें बताता है कि व्यक्तिगत स्तर पर निर्णय कैसे लिए जाते हैं। MP Board और CBSE Board दोनों के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अंकदायक है।
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