Exam-Oriented Notes 2026
अध्याय 1 : मानव भूगोल – प्रकृति एवं विषय क्षेत्र
मानव भूगोल का अर्थ
मानव भूगोल भूगोल की वह शाखा है, जो मनुष्य और उसके पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है।
👉 इसमें यह समझा जाता है कि:
• मनुष्य प्राकृतिक पर्यावरण को कैसे प्रभावित करता है।
• प्रकृति मनुष्य के जीवन, संस्कृति व आर्थिक गतिविधियों को कैसे प्रभावित करती है।
• मनुष्य प्राकृतिक पर्यावरण को कैसे प्रभावित करता है।
• प्रकृति मनुष्य के जीवन, संस्कृति व आर्थिक गतिविधियों को कैसे प्रभावित करती है।
📌 परिभाषा (Ratzel के अनुसार): "मानव भूगोल पृथ्वी की सतह पर मानव समुदायों का अध्ययन है।"
मानव भूगोल की प्रकृति
मानव भूगोल की प्रकृति बहुआयामी (Multidimensional) होती है।
1. मानव एवं प्रकृति का संबंध:
1. मानव एवं प्रकृति का संबंध:
- प्रारंभिक मानव प्रकृति पर पूर्ण रूप से निर्भर था।
- आधुनिक मानव तकनीक द्वारा प्रकृति को नियंत्रित करता है।
- वर्तमान में सतत विकास (Sustainable Development) की अवधारणा प्रमुख है।
- यह मानव समाज, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, जनसंख्या आदि का अध्ययन करता है।
- यह इतिहास, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र से संबंधित है।
- मानव गतिविधियाँ कहाँ, क्यों और कैसे होती हैं – इसका विश्लेषण।
- जनसंख्या वितरण, उद्योगों का स्थान, परिवहन नेटवर्क आदि।
मानव–पर्यावरण संबंध की अवधारणाएँ
1. पर्यावरणीय नियतिवाद (Environmental Determinism):
- प्रकृति मनुष्य को नियंत्रित करती है।
- मानव क्रियाएँ पर्यावरण द्वारा निर्धारित होती हैं।
- 📌 समर्थक: रैट्ज़ेल
- प्रकृति अवसर प्रदान करती है।
- मनुष्य अपने ज्ञान व तकनीक से विकल्प चुनता है।
- 📌 समर्थक: विडाल डी ला ब्लाश
- विकास की सीमा प्रकृति तय करती है।
- अंधाधुंध दोहन विनाशकारी है।
- 📌 आधुनिक एवं संतुलित दृष्टिकोण।
मानव भूगोल का विकास
• प्रारंभिक काल: ग्रीक विद्वान (हेरोडोटस, स्ट्रैबो) द्वारा प्रकृति केंद्रित अध्ययन।
• जर्मन स्कूल: रैट्ज़ेल जिन्होंने पर्यावरणीय नियतिवाद की नींव रखी।
• फ्रांसीसी स्कूल: विडाल डी ला ब्लाश जिन्होंने संभाव्यवाद को बढ़ावा दिया।
• आधुनिक काल: मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर केंद्रित।
• जर्मन स्कूल: रैट्ज़ेल जिन्होंने पर्यावरणीय नियतिवाद की नींव रखी।
• फ्रांसीसी स्कूल: विडाल डी ला ब्लाश जिन्होंने संभाव्यवाद को बढ़ावा दिया।
• आधुनिक काल: मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर केंद्रित।
मानव भूगोल के विषय क्षेत्र (Scope)
मानव भूगोल का विषय क्षेत्र बहुत विस्तृत है:
- जनसंख्या भूगोल: वितरण, घनत्व, वृद्धि और प्रवास।
- आर्थिक भूगोल: कृषि, उद्योग, खनन, व्यापार और परिवहन।
- सामाजिक भूगोल: जाति, धर्म, भाषा और सामाजिक संरचना।
- सांस्कृतिक भूगोल: संस्कृति, रहन-सहन, कला और परंपराएँ।
- राजनीतिक भूगोल: राज्य, सीमाएँ, अंतरराष्ट्रीय संबंध और भूराजनीति।
- बस्ती भूगोल: ग्रामीण व नगरीय बस्तियाँ और नगरीकरण।
उद्देश्य एवं महत्व
🎯 मुख्य उद्देश्य:
- मानव एवं प्रकृति के संतुलन को समझना।
- संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना।
- मानव कल्याण एवं सतत विकास सुनिश्चित करना।
- विकास योजनाओं के निर्माण में सहायक।
- पर्यावरण संरक्षण और जनसंख्या नियंत्रण।
- क्षेत्रीय असमानताओं की पहचान और नीति निर्माण।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण (Ultra Fast)
• मानव भूगोल = मानव + पर्यावरण संबंध
• रैट्ज़ेल → नियतिवाद
• विडाल डी ला ब्लाश → संभाव्यवाद
• आधुनिक दृष्टिकोण → सतत विकास
• मानव भूगोल एक सामाजिक विज्ञान है
• पर्यावरणीय नियतिवाद प्रकृति को सर्वोपरि मानता है
• रैट्ज़ेल → नियतिवाद
• विडाल डी ला ब्लाश → संभाव्यवाद
• आधुनिक दृष्टिकोण → सतत विकास
• मानव भूगोल एक सामाजिक विज्ञान है
• पर्यावरणीय नियतिवाद प्रकृति को सर्वोपरि मानता है
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