अध्याय 2 : उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत | Ultra Revision – Detailed Notes prepared for MP Board & CBSE Board Exams

 

Economics Revision Notes - Consumer Behaviour
Author ✍️ R. Littey
BLOG MPSELECTIONPOINT
कक्षा 12वीं – व्यष्टि अर्थशास्त्र
अध्याय 2 : उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत पर
MP बोर्ड एवं CBSE बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार किए गए
Ultra Revision – Detailed Notes

📘 अध्याय 2 : उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

1️⃣ उपभोक्ता एवं उपभोग

उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का उपभोग करता है। उपभोग का अर्थ है – वस्तु या सेवा का उपयोग कर अपनी आवश्यकता को संतुष्ट करना।

📌 उपभोक्ता का मुख्य उद्देश्य: अधिकतम संतुष्टि (Maximum Satisfaction) प्राप्त करना।

👉 उपभोक्ता सीमित आय में अधिकतम संतोष प्राप्त करने का प्रयास करता है।

2️⃣ उपयोगिता (Utility)

उपयोगिता वह शक्ति या क्षमता है जिसके द्वारा कोई वस्तु मानव की आवश्यकता को संतुष्ट करती है।

  • उपयोगिता एक मानसिक अनुभव है।
  • यह व्यक्ति, स्थान और समय के अनुसार बदलती है।
  • उपयोगिता का संबंध "उपयोग" से है, नैतिकता से नहीं।

उदाहरण: शराब – सामाजिक रूप से हानिकारक हो सकती है, लेकिन शराबी उपभोक्ता के लिए उपयोगिता रखती है।

3️⃣ उपयोगिता के प्रकार

(i) कुल उपयोगिता (Total Utility – TU): किसी वस्तु की सभी उपभोग की गई इकाइयों से प्राप्त कुल संतोष।

TU = ΣMU (सभी इकाइयों की उपयोगिता का योग)

(ii) सीमांत उपयोगिता (Marginal Utility – MU): किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई का उपभोग करने से कुल उपयोगिता में होने वाला परिवर्तन।

MU = TUₙ – TUₙ₋₁

4️⃣ TU और MU का संबंध

  1. जब TU बढ़ती है → MU धनात्मक होती है।
  2. जब TU अधिकतम होती है → MU शून्य होती है (पूर्ण तृप्ति बिंदु)।
  3. जब TU घटने लगती है → MU ऋणात्मक हो जाती है।

5️⃣ सीमांत उपयोगिता ह्रास का नियम

नियम का कथन: "जैसे-जैसे किसी वस्तु की खपत बढ़ती जाती है, उससे प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता (MU) निरंतर घटती जाती है।"

मान्यताएँ: उपभोग निरंतर होना चाहिए, वस्तु की इकाइयाँ समान होनी चाहिए, और उपभोक्ता की मानसिक स्थिति स्थिर होनी चाहिए।

6️⃣ उपयोगिता मापन के दृष्टिकोण

(A) कार्डिनल दृष्टिकोण: मार्शल द्वारा प्रतिपादित। इसके अनुसार उपयोगिता को संख्याओं (1, 2, 3) में मापा जा सकता है।

(B) ऑर्डिनल दृष्टिकोण: हिक्स एवं ऐलन द्वारा प्रतिपादित। इसके अनुसार उपयोगिता की केवल तुलना (Rank) की जा सकती है।

7️⃣ उपभोक्ता संतुलन (Consumer’s Equilibrium)

वह स्थिति जहाँ उपभोक्ता अपनी सीमित आय से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है।

(A) एक वस्तु की स्थिति: संतुलन की शर्त → MUₓ = Pₓ

(B) दो वस्तुओं की स्थिति: संतुलन की शर्त → MUₓ / Pₓ = MUᵧ / Pᵧ

8️⃣ बजट रेखा (Budget Line)

बजट रेखा उन सभी संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी आय और बाजार कीमतों पर खरीद सकता है।

समीकरण: PₓX + PᵧY = M

9️⃣ बजट समुच्चय (Budget Set)

उन सभी वस्तुओं के बंडलों का संग्रह जिन्हें उपभोक्ता अपनी दी गई आय और प्रचलित बाजार कीमतों पर खरीद सकता है। इसमें बजट रेखा के ऊपर और उसके अंदर के सभी बिंदु शामिल होते हैं।

🔟 उदासीनता वक्र (Indifference Curve – IC)

उदासीनता वक्र दो वस्तुओं के उन संयोजनों को दर्शाता है, जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है।

विशेषताएँ:

  • यह बाएं से दाएं नीचे की ओर गिरता है।
  • यह मूल बिंदु की ओर उन्नतौदर (Convex) होता है।
  • दो उदासीनता वक्र कभी एक-दूसरे को नहीं काटते।

1️⃣1️⃣ सीमांत प्रतिस्थापन दर (MRS)

X की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने के लिए उपभोक्ता Y की जितनी मात्रा छोड़ने को तैयार होता है।

MRSₓᵧ = ΔY / ΔX

1️⃣2️⃣ IC एवं बजट रेखा द्वारा संतुलन

उपभोक्ता संतुलन वहां होता है जहां उदासीनता वक्र (IC) बजट रेखा को स्पर्श करता है।

शर्त: MRSₓᵧ = Pₓ / Pᵧ

1️⃣3️⃣ मूल्य प्रभाव (Price Effect)

जब अन्य बातें समान रहें और किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन हो, तो उसकी मांगी गई मात्रा में होने वाला परिवर्तन मूल्य प्रभाव कहलाता है।

1️⃣4️⃣ प्रतिस्थापन प्रभाव

जब एक वस्तु सस्ती हो जाती है, तो उपभोक्ता महंगी वस्तु के स्थान पर सस्ती वस्तु का प्रयोग करने लगता है।

1️⃣5️⃣ आय प्रभाव

वस्तु की कीमत कम होने से उपभोक्ता की "वास्तविक आय" (क्रय शक्ति) बढ़ जाती है, जिससे वह अधिक माल खरीद सकता है।

1️⃣6️⃣ गिफ़न वस्तु (Giffen Goods)

ये वे घटिया वस्तुएँ हैं जिन पर मांग का नियम लागू नहीं होता। इनकी कीमत बढ़ने पर मांग भी बढ़ जाती है।

उदाहरण: बहुत मोटा अनाज, जिसे निर्धन वर्ग मजबूरी में उपयोग करता है।

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