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मिशन 2030: एसडीजी की दौड़ में भारत और 'ग्लोबल साउथ' का बढ़ता 'विश्व-बंधु'
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDGs), जिन्हें एजेंडा 2030 के नाम से भी जाना जाता है, गरीबी उन्मूलन से लेकर जलवायु परिवर्तन तक 17 वैश्विक लक्ष्यों का एक महत्वाकांक्षी रोडमैप है। 2015 में अपनाए गए इन लक्ष्यों को 2030 तक पूरा करना है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें बताती हैं कि वैश्विक प्रगति धीमी है। ऐसे में, दुनिया की 17% आबादी और बड़ी संख्या में गरीब जनसंख्या वाले भारत की प्रगति वैश्विक औसत को सीधे प्रभावित करती है।
🎯 भारत की SDG प्रगति: मील के पत्थर और चुनौतियाँ
• SDG 1 (कोई गरीबी नहीं) और SDG 2 (शून्य भूख): 'आकांक्षी जिला कार्यक्रम' ने सामाजिक व अवसंरचना संकेतकों में सुधार किया। मुफ्त अनाज योजनाएँ भूखमरी घटाने में सहायक रहीं।
• SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) व SDG 7 (स्वच्छ ऊर्जा): 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'उज्ज्वला योजना' ने बड़े परिवर्तन लाए।
• SDG 8 (सभ्य कार्य और आर्थिक विकास): भारत 7.7%+ की विकास दर के साथ विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में है।
• चुनौतियाँ: SDG 4, SDG 5 और SDG 12 में प्रगति को और तेज करना आवश्यक है।
🌍 ग्लोबल साउथ में भारत का बढ़ता प्रभाव: 'विश्व गुरु' से 'विश्व बंधु' तक
'ग्लोबल साउथ' मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों का समूह है। समान समस्याओं और साझा विकास लक्ष्यों के कारण भारत इन देशों की सामूहिक आवाज को सशक्त करते हुए 'विश्व बंधु' के रूप में उभरा है।
• G20 की अध्यक्षता (2023): भारत ने 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट' आयोजित कर विकासशील देशों के मुद्दों को विश्व मंच पर रखा।
• अफ्रीकी संघ का G20 में समावेश: भारत की पहल पर अफ्रीकी संघ के लिए स्थायी सदस्यता — समावेशी ग्लोबल साउथ की दिशा में बड़ा कदम।
• मल्टी-अलाइनमेंट कूटनीति: रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हुए क्वाड में सक्रिय रहना भारत की रणनीतिक स्वायत्तता दिखाता है।
• रक्षा कूटनीति: भारत आर्मेनिया जैसे देशों को पिनाका व आकाश जैसी रक्षा प्रणालियाँ निर्यात कर रहा है — भरोसेमंद रक्षा भागीदार की भूमिका।
• आर्थिक सहयोग: 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' न केवल घरेलू विकास को बल्कि ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करते हैं।
निष्कर्ष
एजेंडा 2030 को सफल बनाने में भारत की भूमिका निर्णायक है। सहकारी संघवाद, वित्तीय नवाचार और डेटा-आधारित शासन के माध्यम से भारत न सिर्फ अपने SDGs हासिल कर सकता है, बल्कि दुनिया को एक नया विकास मॉडल भी दे सकता है। ग्लोबल साउथ में भारत का नेतृत्व वैश्विक शासन को अधिक न्यायसंगत और समावेशी दिशा में आगे बढ़ाता है।
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