⭐ मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन 2025: बड़े Defence & Trade फैसले
UPPSC & MPPSC परीक्षा हेतु विशेष रिपोर्ट
1. Trade & Investment (व्यापार और निवेश)
लक्ष्य: 2030 तक $100 Billion के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया।
महत्व: Target-based आर्थिक कूटनीति को दर्शाता है। यह भारत की $5 Trillion Economy बनने की राह को आसान बनाने पर केंद्रित है।
2. Defence & Security (रक्षा और सुरक्षा)
समझौता: Reciprocal Exchange of Logistics Support (RELOS) समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
महत्व: यह लॉजिस्टिक समझौता युद्धपोतों और सैन्य विमानों को एक-दूसरे के बंदरगाहों/ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देगा, जिससे Operational Readiness बढ़ेगी।
3. Energy & Nuclear (ऊर्जा और परमाणु)
सहयोग: कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की इकाइयों का तेजी से निर्माण और नए Nuclear Power Projects की संभावना तलाशने पर सहमति बनी।
महत्व: भारत की Clean Energy और Energy Security के लिए महत्वपूर्ण। रूस भारत का सबसे बड़ा Nuclear Energy पार्टनर बना रहेगा।
4. Manpower & Skills (जनशक्ति और कौशल)
समझौता: Labour Mobility Agreement (स्किल इंडिया का विस्तार) पर चर्चा।
महत्व: द्विपक्षीय संबंध अब केवल सरकार से सरकार (G2G) नहीं, बल्कि जन-जन (P2P) से भी जुड़ेंगे।
RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) Agreement सबसे Powerful डील है क्योंकि यह समझौता भारत को हिंद महासागर और उससे आगे अपनी Strategic Reach बढ़ाने में मदद करेगा। यह चीन के बढ़ते प्रभाव (String of Pearls) को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Diversification: नए समझौते Critical Minerals, Pharma, Agriculture, Fertilizers और IT जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे, क्योंकि व्यापार अभी मुख्य रूप से तेल और रक्षा तक सीमित है।
रुपया-रूबल व्यापार: दोनों देशों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति जताई, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी। यह Multipolar World Order के भारत के विजन के अनुरूप है।
Strategic Autonomy: शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर साबित किया कि भारत किसी भी Power Bloc का हिस्सा नहीं है और वह अमेरिका/पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने के लिए दृढ़ है।
BRICS & SCO: वैश्विक संस्थानों में सुधार और एक बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था बनाने के भारत के लक्ष्य को सपोर्ट करने के लिए दोनों नेताओं ने इन मंचों पर सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन 2025 भारत की Realpolitik (व्यावहारिक राजनीति) को दर्शाता है। यह संबंध वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती शक्ति और 'विश्वास-आधारित कूटनीति' (Trust-Based Diplomacy) का एक मजबूत प्रमाण है। यह रिश्ता सिर्फ इतिहास पर आधारित नहीं है, बल्कि रक्षा आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने वाला एक प्रगतिशील गठबंधन है।
अगला कदम: क्या आप चाहते हैं कि मैं इस शिखर सम्मेलन के Defense Sector से जुड़े Specific Agreements पर एक Quick UPSC/MPPSC Q&A तैयार करूँ?

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